पंचायत योजनायें
(क) पी.आर.आई.योजना
उद्देश्यः-
ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यो हेतू केन्द्रीय सरकार
द्वारा राज्य सरकार के माघ्यम से राशि प्रदान की जाती है।
कार्यो का विवरण:-
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा,स्वास्थ्य,पीने
के पानी की सुविधा,
स्ट्रीट लाईटिंग,
साई व्यवस्था व सरकार द्वारा अनुमोदित अन्य कार्य,
जो
किसी अन्य स्कीम मे कवर नहीं हो सकते,
के
लिये राशि दी जा सकती है।
प्रक्रिया:-
इस स्कीम के तहत केन्द्र सरकार से प्राप्त राशि का खर्च/बंटवारा निम्न
अनुसार किया जाता है।
-
10 प्रतिशत राशि जिला परिषद को
-
15 प्रतिशत राशि पंचायत समितियों को
-
75 प्रतिशत राशि सीधे ग्राम पंचायतों को वितरित की जाती है।
-
ग्रान्ट कर राशि खर्च करने हेतू कम से कम 25 प्रतिशत राशि सम्बन्धित
पंचायती राज संस्था अथवा लाभार्थी द्वारा मैंचिग शेयर के रूप में खर्च
की जानी अनिवार्य है।
-
अलाट की गई राशि का 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति व कमजोर वगं के कल्याण
हेतू पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तरों पर खर्च किया जाना आवश्यक
है।
(ख) राजस्व आय योजना
उद्देश्यः-
इस स्कीम का मुख्य उद्देशेय ग्राम पंचायतो/पंचायत समितियों को
ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करवाकर उनकी आय में बढौतरी करना है।
कार्यों का विवरण:-
1 पंचायत की शामलात भूमि में टयूबवैल लगवाने हेतू।
2 पंचायतों की भूमि समतल करने व सुधार हेतू
3 दुकानों के निर्माण हेतू।
प्रक्रिया:-
इस स्कीम का ऋण लेने हेतू निम्न दस्तावेज पूर्ण करने उपरान्त
स्वीकृत हेतू सरकार को भेजे जाते है।
1 ग्राम पंचायत/पंचायत समिति का प्रस्ताव
2 खण्ड के कनिष्क अभियन्ता से प्रस्तावित कार्य का प्राकलन/साईट
प्लान
3
पंचायत की भूमि की दर्ज जमाबन्दी,
खसरा गिरदावरी
4 प्रस्तावित कार्य से पंचायत को होने वाली आस का ब्यौरा।
5 निर्धारित फार्म पर केस का विवरण
(ग) शामलात भूमि को पटटे पर देना
उद्देश्यः-
शामलात भूमि को पटटे पर देकर ग्रामीण विकास कें लिये आय अर्जित
करना।
प्रक्रिया:-
1 ग्राम पंचायतें अपना प्ररूताव पारित करके शामलात भूमि पटटे पर देने
हेतू तारिख निर्धारित करती है जिसके लिये गांव में मुश्तरी मुनादी करवाई
जाती है।
2 निश्चित तिथि को खण्ड कार्यालय के किसी अधिकारी की उपस्थिति में
सार्वजनिक स्थान पर खुली बोली से भूमि पटटे पर दी जाती है।
3
100 एकड से अधिक भूमि की बोली
DDPO / SDM
की
निगरानी में की जाती है। कुल कृषि योग्य शामलात भूमि मे से 33 प्रतिशत
भूमि अनूसूचित जाति के लिये आरक्षित होती है।
4 बोली देने से पूर्व बोली दाता को पंचायत द्वारा निश्चित राशि को
सिक्योरिटी जमा करवानी आवश्यक होती है।
5 बोली की तमाम राशि मौके पर जमा करवानी आवश्यक है अन्यथा उसकी
सिक्योरिटी जब्त करके बोली पुन: रखी जाती है ।
पात्रताः-
कोई भी नागरिक निर्धारित सिक्योरिटी जमा करवाकर ही बोली की प्रक्रिया में
शामिल हो सकता है ।
खर्च
-
पंचायत बहुमत से प्रस्ताव पारित करके शामलात भूमि से प्राप्त आय गांव
के किसी भी सामुहिक विकास कार्य पर खर्च कर सकती है।
-
कार्य शुरू करने से पूर्व प्रशासकीय व तकनीकी स्वीकृति ली जानी आवश्यक
है ।
-
1 25 लाख रू तक के कार्य प्रशसकीय स्वीक़ति स्ंवय पंचायत देने में
सक्ष्म है।
-
1.25लाख से 3.00 लाख तक सम्बन्धित पंचायत समिति तथा 3.00 लाख से 5.00
लाख तक जिला परिषद प्रशासकीय स्वीकृति देने में सक्षम है।
-
5.00 लाख से उपर सरकार से प्रशासकीय स्वीकृति लेनी अनिवार्य है।
(घ्)
सबसिडी स्कीम (चौपालों
की मुरम्मत)
उद्देश्यः-
इस स्कीम के तहत सरकार द्वारा हरिजन/पिछडी जाति की चौपालों की
मुरम्मत एंव पूर्ण करने हेतू राशि अनुदान के रूप में दी जाती है।
कार्यो का विवरण:-
अधूरी चौपालों को पुर्ण करना व उनकी मुरम्मत करना।
प्रक्रिया:-
1. खण्ड के कनिष्क अभियन्ता से चौपालो का अनुदान/साईट प्लान
बनवाना।
2. सम्बन्धित पंचायत से प्रस्ताव मांगा जाता है।
सहायता:-
सरकार की नीति अनुसार 10,000
रूपये चौपाल की मुरम्मत तथा 20,000
रूपये अधूरी चौपाल को पूरी करने हेतू दिये जाते है।
सम्पर्क:-
जिला विकास एंव पंचायत अधिकारी फोन
: 2220588
Room No. 22
लघु सचिवालय सोनीपत,